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निर्मल गंगा अभियान को लगाया पलीता, गंगोत्री राजमार्ग पर धड़ल्ले से चल रहा स्टोन क्रेशर, एनजीटी के मानक ताक पर

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राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को मुंह चिढ़ाता भागीरथी नदी पर बना स्टोन क्रेशर

उत्तरकाशी ।एक तरफ केन्द्र व राज्य सरकार निर्मल गंगा अभियान पर करोड़ों खर्च का दावा कर रही है। पर उत्तराखंड सरकार के शासन व प्रशासन की इस निर्मल गंगा योजना को धराशायी करता भागीरथी नदी में चल रहा अवैध स्टोन क्रेशर इस बात का प्रमाण है कि यह योजना सिर्फ कागजी है।

जनपद मुख्यालय उत्तरकाशी से मात्र सात किलोमीटर दूर डुंडा तहसील की मातली ग्रामसभा में धड़ल्ले से चल रहाअवैध क्रेशर बताता है कि निर्मल गंगा का नारा सिर्फ नारा मात्र है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना यह स्टोन क्रेशर स्थानीय प्रशासन की नजरों में है लेकिन इसके बावजूद घनी आबादी में संचालित इस स्टोन क्रेशर की तरफ से प्रशासन ने क्यों आंखें मूंद रखी है। यह गंभीर सवाल है। स्थानीय प्रशासन की आखिर क्या विवशता है जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश भी इस स्टोन क्रेशर पर लागू नहीं होते।

स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में संदेह के घेरे में हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के मानकों का  खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। गौरतलब है कि यह स्टोन क्रेशर गंगोत्री को जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। हर किसी को यह स्टोन क्रेशर दिखता है पर कार्रवाई की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहा। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस स्टोन क्रेशर की वजह से यहां नागरिकों को दिक्कत तो है ही। भागीरथी (गंगा) भी प्रदूषण की जद में हैं। क्या ऐसे ही निर्मल गंगा का सपना साकार हो पायेगा।

आश्चर्य का विषय तो यह है कि यहाँ पर नजदीक ही आईटीबीपी का मुख्यालय भी है। मतलब इस स्टोन क्रेशर के आसपास से तमाम अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद इस स्टोन क्रेशर का संचालित होना सरकार के लिए एक चुनौती है या जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहाँ के जनप्रतिनिधि और प्रशासन के अधिकारी इस स्टोन क्रेशर को लेकर कार्रवाई नहीं कर रहे।  इसके पीछे उन लोगों का क्या हित छिपा हुआ है।  जिस वजह से धड़ल्ले से भागीरथी के सीने पर बने इस स्टोन क्रेशर ने सरकार को खामोश कर दिया है।

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