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“ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे”, शिवसेना और भाजपा की एक लाइन की कहानी

नई दिल्ली। ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे की तर्ज पर महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद चल रही है। ना नुकुर के बीच अटकलों का बाजार गर्म है पर हमेशा की तरह कुछ दिन तक आंखें तरेरने के बावजूद शिवसेना को अंततः भाजपा को ही समर्थन देना होगा और अपनी 50 -50 की शर्त को त्यागना होगा।

उधर  महाराष्ट्र के सीएम के तौर पर शपथ लेने से ठीक पहले नेता देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है।  उन्होंने शिवसेना के साथ बीजेपी के गठबंधन के बाद हम राज्य में एक मजबूत और स्थाई सरकार देने जा रहे हैं।उन्होंने यह बात पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कई।  देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार बनाने से जुड़ी प्रक्रिया की शुरुआत दीवाली के बाद से की जाएगी।  जनता जो जनादेश दिया है वह बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में है।  और हम आने वाले दिनों में राज्य में एक स्थाई और मजबूत सरकार देने जा रहे हैं। 

देवेंद्र फडणवीस का यह बयान उस समय आया है जब शिवसेना ने राज्य में बीजेपी शिवसेना गठबंधनकी सरकार बनाने से पहले 50-50 फॉर्मूले पर लिखित में देने की बात कही है।  कुछ दिन पहले शिवसेना ने अपने सभी विधायकों के साथ बैठक करने के बाद यह बात कही थी कि बीजेपी जब तक 50-50 फॉर्मूले पर लिखित में नहीं देगी, शिवसेना सरकार में शामिल नहीं होगी।

विधायक दल की बैठक में फैसला लिया गया था कि पहले बीजेपी लिखित में दे कि वह ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री वाले यानी 50-50 वाले फॉर्मूले पर राजी है। शिवसेना विधायक रमेश लटके मीटिंग खत्म होने के बाद कि सारे अधिकार उद्धव जी को दिये गए हैं। जो वो कहेंगे वही होगा।

वहीं एक और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने कहा था कि बीजेपी जब तक लिखित में नही देगी तब तक शिवसेना सरकार में शामिल नहीं होगी। जो तय हुआ है 50 – 50 फार्मूला उसके तहत ढाई ढाई साल का मुख्यमंत्री होना चाहिए। महाराष्ट्र के ज़्यादातर शिव सेना विधायक चाहते हैं कि इस बार शिव सेना को मुख्यमंत्री का पद दिया जाये और यह पद आदित्य ठाकरे को मिले। इन विधायकों का का कहना है कि उनके पास नई सोच है। विधानसभा चुनावों में शिवसेना को 56 सीटें मिलीं हैं।

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