एक और बैंक घोटाला, एक लाख ग्राहकों का करोड़ों रुपया फंसा

नई दिल्ली। पीएमसी बैंक घोटाले के बाद एक और को-ऑपरेटिव बैंक का घोटाला सामने आया है। पुणे मुख्यालय वाले शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक लिमिटेड के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक लिमिटेड के कामकाज में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद राज्य सरकार ने निदेशक मडंल को बर्खास्त कर दिया है और प्रशासक नियुक्त कर दिया है।

बता दें कि आरबीआई की ओर से 6 मई को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार शिवाजीराव भोसले बैंक पर 4 मई 2019 से प्रतिबंध लागू हैं। प्रतिबंध के चार माह बीतने के बाद भी आरबीआई ने अब तक इस बैंक को लेकर कोई फैसला नहीं किया है, जिससे बैंक के ग्राहक परेशान हैं। बैंक में गड़बड़ी से करीब एक लाख ग्राहक प्रभावित हुए हैं, फिलहाल इन जमाकर्ताओं का पैसा फंस गया है, खाता धारक फिलहाल अपना पैसा बैंक से नहीं निकाल पा रहे हैं।

गौरतलब है कि इस बैंक के प्रमोटर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य अनिल शिवाजीराव भोसले हैं। सहकारिता आयुक्त सतीश सोनी ने 9 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अप्रैल 2019 में की गई विशेष जांच-पड़ताल में बैंक के कामकाज में कई ‘गंभीर अनियमितताओं’ का खुलासा किया गया है। आदेश में कहा गया है कि सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार और सहकारी आयुक्त ने आरबीआई के साथ विचार-विमर्श के बाद बैंक के मौजूदा निदेशक मंडल को हटा दिया है और उसके स्थान पर उप- जिला रजिस्ट्रार नारायण आघव को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। आदेश में बताया गया कि सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार और सहकारी आयुक्त ने आरबीआई के साथ चर्चा के बाद यह फैसला लिया है।

आरबीआई ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की उपधारा (1) के सेक्शन 35ए के तहत शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक पर यह प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत आरबीआई ने बैंक के ग्राहकों को केवल 1 हजार रुपए तक निकालने की छूट दी थी। साथ ही आरबीआई ने अगले आदेशों तक बैंक से किसी भी प्रकार की निकासी, जमा, लोन, निवेश या अन्य किसी भी प्रकार के भुगतान पर रोक लगा दी थी। आरबीआई ने बैंक के वित्तीय हालातों में मजबूती आने तक इन प्रतिबंधों के लागू होने की बात कही थी।

संकटग्रस्त बैंकों के जमाकर्ताओं के मामलों को बढ़ाने वाले समूह के सदस्य मिहिर थाटे ने कहा कि शिवाजीराव भोंसले सहकारी बैंक के करीब एक लाख खाताधारक फिलहाल बैंक से अपना पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिज्ञों की आड़ में फर्जी कर्जदारों को 300 करोड़ रुपए का कर्ज वितरित किया गया जिसकी वजह से मौजूदा संकट खड़ा हुआ है।

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