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खरी खरी :गुजरात से प्रवासियों को उत्तराखंड लाने का मुद्दा गरमाया, भ्रम किसने पैदा किया? मीडिया पर गुस्सा क्यों?

@ विनोद भगत 

लगता है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सोशल मीडिया पर अपने विरुद्ध चल रहे प्रचार तंत्र को नहीं भेद पा रहे। इसमें किसकी कमी है यह जांच का विषय है। अपनी कमियों का ठीकरा मीडिया पर फोड़ना भी उचित नहीं है। मीडिया की आलोचना को विरोध समझने की परिपाटी भी सही नहीं है। 

ताजा मामला सूरत से उत्तराखंड के प्रवासियों को ट्रेन से लाने का है। जैसे ही ये प्रवासी उत्तराखंड के काठगोदाम पहुंचे ठीक उसी के बाद सोशल मीडिया पर कहा जाने लगा कि गुजरात से आये इन प्रवासियों को उत्तराखंड पहुंचाने के लिए सूरत में रह रहे एक प्रवासी डा देवेश्वर भट्ट के प्रयासों का परिणाम है। यही नहीं इन प्रवासियों के टिकट का पूरा खर्च भी डा भट्ट ने ही उठाया है। बताया जाता है कि डा भट्ट की पुत्री ने इस आशय का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। हालांकि वीडियो में वह ट्रेन के टिकट दिखा रही हैं। यही नहीं रेडियो जॉकी सपना भट्ट ने अपने पिता देवेश्वर भट्ट के साथ भी बातचीत दिखाई जिसमें खर्च खुद करने की बात कहीं नहीं की गई है। हालांकि इसके लिए डा देवेश्वर भट्ट ने प्रयास जरूर किये।

जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो सूबे की त्रिवेंद्र सरकार पर झूठ बोलने के संदेश भी वायरल होने लगे कि गुजरात से प्रवासियों को उत्तराखंड लाने में डा देवेश्वर भट्ट ने टिकट के पैसे दिये। 

इस पर सूबे की सरकार की किरकिरी होने लगी। तब उत्तराखंड सरकार का सोया हुआ मीडिया मैनेजमेंट हतप्रभ रह गया। ऐसे में आनन फानन में सरकारी तंत्र हरकत में आया। गुजरात के उत्तराखंड महासभा के अध्यक्ष डा देवेश्वर भट्ट को सामने लाया गया। उनकी ओर से एक वीडियो संदेश जारी किया गया। इस वीडियो संदेश में डा भट्ट ने कहा कि गुजरात से प्रवासियों को उत्तराखंड लाने का पूरा खर्च उत्तराखंड सरकार ने ही किया है। उन्होने और उनके साथियों ने सिर्फ प्रबंधन (मैनेजमेंट) किया।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि त्रिवेंद्र सरकार का मीडिया मैनेजमेंट इस मामले में में सुस्त नजर आया। वहीं डा देवेश्वर भट्ट की पुत्री सपना भट्ट ने जो वीडियो पहले जारी किया था उससे यह भ्रम होना स्वाभाविक था कि प्रवासियों को लाने में उत्तराखंड सरकार का योगदान नहीं था। हालांकि बाद में डा देवेश्वर भट्ट के वीडियो संदेश में जरूर सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को इस बात का श्रेय दिया गया है।

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