काशीपुर :शरजील इमाम पर लगी जो धारा वही राजीव अग्रवाल पर लगने से पेंच फंसा,एक पक्ष हर हाल में गिरफ्तारी चाहता है, बेवजह तूल देना गलत दूसरे पक्ष का मत

काशीपुर । फेसबुक पर सिक्खों के विरूद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर नगर में राजनीतिक माहौल गर्म है। भाजपा नेता व पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल ने फेसबुक पर टिप्पणी के बाद फेसबुक पर ही खेद भी जता दिया था। राजीव अग्रवाल की टिप्पणी पर सिक्ख समुदाय ने न केवल आक्रोश जताया कोतवाली में तहरीर भी दे दी। और तमाम सिक्ख राजीव अग्रवाल के विरूद्ध लामबंद होने शुरू हो गये। इस बीच राजीव अग्रवाल के पक्ष में भी लोगों ने फेसबुक पर ही समर्थन देना शुरू कर दिया।

भाजपा में होने की वजह से से कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को हाथों हाथ लिया और तुरंत महानगर कांग्रेस अध्यक्ष संदीप सहगल का एक बयान इस टिप्पणी के विरोध में आया। हालांकि उसके बाद कांग्रेस इस मुद्दे पर पर पीछे हटती दिखाई दे रही हैं।

उधर भाजपा के विधायक हरभजन सिंह चीमा ने भी इस मुद्दे पर अपना एक बयान जारी कर विरोध की औपचारिकता निभा दी। एक ही पार्टी में रहते हुए और एक जनप्रतिनिधि होते हुए विधायक चीमा ने राजीव अग्रवाल के विरूद्ध बयान देने में देर की। वहीं पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल के समर्थन में शहर का एक बड़ा तबका साथ आने से यह मामला विचित्र स्थिति में है। सिक्खों के संगठनों ने कोतवाली में जाकर राजीव की गिरफ्तारी के लिए जोर दिया। लेकिन पुलिस ने उन्हें समझाया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे कार्रवाई होगी।

इस मामले में एक खास बात यह है कि राजीव अग्रवाल के विरूद्ध जो धारा लगाई गई है वह अपने आप में काफी संगीन है। बता दें कि शरजील इमाम पर भी एक धारा यही 153ए लगाई गई है। आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। धारा 153 (ए) के तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर ये अपराध किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।

दरअसल  समर्थकों का कहना है कि इस संगीन धारा में एक भाजपा नेता पर मुकदमा दर्ज करवाना एक साजिश है। जब अपनी टिप्पणी के बाद राजीव अग्रवाल ने खेद जता दिया तो मामले में इतनी संगीन धारा के पीछे क्या मकसद है।रिपोर्ट दर्ज कराने वाला पक्ष इस मामले में पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल की गिरफ्तारी पर अड़ा हुआ है। विधायक हरभजन सिंह चीमा ने मामले को स्थानीय स्तर से उठाकर एसजीपीसी के पाले में डालकर एक तरह खुद को इस मामले से अलग कर लिया है।

उधर सूत्रों की मानें तो इस मामले में प्रदेश स्तर के भाजपा नेता भी सक्रिय हो गये हैं। बता दें कि आरएसएस से जुड़े रहे राजीव अग्रवाल की भाजपा संगठन में बड़ी पैठ है। पार्टी प्रत्याशी के विरूद्ध चुनाव लड़ने के बावजूद स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राजीव अग्रवाल को लालकुंआ में आयोजित कार्यक्रम में ससम्मान पार्टी में वापसी कराई थी। हालांकि काशीपुर में कुछ भाजपा नेता इसके विरोध में थे।

सिख समुदाय के लोग जहाँ राजीव अग्रवाल के विरोध में हैं तो सिख समुदाय से ही लोग राजीव के समर्थन में हैं। एक पक्ष जहाँ राजीव की टिप्पणी को पूरे समुदाय का अपमान बता रहा है तो दूसरा पक्ष एक व्यक्ति विशेष का।दोनों ही पक्ष अपनी अपनी बात पर अड़े हुए हैं। फैसला पुलिस को ही करना है।

उधर पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल के समर्थन में आये लोगों का मत है कि इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। जब मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गयी तो यह पुलिस का काम है कि जांच के बाद कार्रवाई करे। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी सोशल मीडिया पर पोस्ट डालना गलत है। बहरहाल दोनों पक्ष अपना अपना जोर लगा रहे हैं।

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