काशीपुर विधानसभा हलचल :ये हैं जो कांग्रेस को जीत दिला सकते हैं, बाकि हार की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे

@विनोद भगत

काशीपुर । दावेदारों की बढ़ती संख्या इस बार फिर कांग्रेस के लिए हार की भूमिका तैयार करने जा रही है। काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में तमाम चुनाव हार चुकी कांग्रेस के लिए मौजूदा भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा के विरूद्ध तैयार हो रही जमीन पर एक बार फिर से कांग्रेस के ही कुछ नेता तुषारापात करने जा रहे हैं। 

यह सच है कि मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा को लेकर भाजपा का एक बड़ा तबका असंतुष्ट है। पर इस सुनहरे अवसर को कांग्रेस के भरोसेमंद माने जाने वाले नेता ही अपनी महत्वाकांक्षा के चलते पलीता लगाने की भी तैयारी कर रहे हैं। निजी महत्वाकांक्षा की खातिर ये लोग एक बार फिर कांग्रेस की हार की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं।

बताते चलें कि काशीपुर में कांग्रेस को जीत की लंबे समय से दरकार है। लेकिन कई प्रयासों के बावजूद कांग्रेस हार के दुस्वप्न से पार नहीं पा रही है। कारण भाजपा से ज्यादा खुद कांग्रेस ही है। कांग्रेस में नेताओं की भरमार है। ऐसे नेताओं में एकाएक पैदा हुये नेता कांग्रेस के लिए हर बार खतरा बने हैं।

बात करते हैं उन कांग्रेस नेताओं की जो हार की इबारत को जीत में बदलने का माद्दा रखते हैं। मौजूदा समय में महानगर कांग्रेस अध्यक्ष संदीप सहगल सबसे ऊपर नजर आते हैं। लंबे समय से नगर में कांग्रेस की बागडोर संभाले संदीप सहगल पार्टी के लिए मुफीद प्रत्याशी साबित हो सकते हैं। लेकिन लगता है कि संदीप की दावेदारी को चुनौती देने की शुरुआत हो गयी है। दरअसल सही मायनों में यह चुनौती संदीप को नहीं वरन कांग्रेस के लिए है। अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर चुके संदीप सहगल को चुनौती देकर पार्टी के साथ विश्वासघात करने की यह कोशिश एक बार फिर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने जा रही है।

रही सही कसर आम आदमी पार्टी पूरी कर देगी। भाजपा से असंतुष्ट लोगों पर आम आदमी पार्टी की नजर है। भाजपा से असंतुष्ट लोग आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। यह तो तय है कि आम आदमी पार्टी के लिए यहाँ जीत की कल्पना कर पाना मुश्किल है। पर चुनाव में सक्रिय होने का लाभ सीधे भाजपा को ही होगा। कांग्रेस के नये ऐसे नेता जो महज टिकट की खातिर झंडा उठाये हैं वह टिकट न मिलने की दशा में निर्दलीय भी मैदान में ताल ठोक सकते हैं।

एक दावेदार प्रदेश सचिव अरूण चौहान भी सामने आ रहे हैं। एक समय हरीश रावत के प्रबल समर्थक  अरूण चौहान लंबे समय से काग्रेस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काबिज रहे हैं। उनकी निष्ठा कांग्रेस के प्रति है। उनका कहना है कि वह कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं टिकट के लिए दावेदारी तो करेंगे लेकिन पार्टी का हित उनके लिए सर्वोपरि है।

उधर गुड़िया परिवार जो इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी रीढ़ समझा जाता है वहाँ से भी डा दीपिका गुड़िया आत्रेय को भी संभावित प्रत्याशी माना जा रहा है। हालांकि उनकी ओर से अभी कोई ऐसा संकेत नहीं है। 

उधर मेयर चुनाव में चंद मतों से पराजित मुक्ता सिंह भी इस बार विधानसभा चुनाव में अपन दावेदारी दर्ज कर सकत है। वह भी पार्टी के लिए जिताऊ प्रत्याशियों में से हैं।

फिलहाल इन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में से ही कोई एक पार्टी का प्रत्याशी बने तो जीत की संभावनाओं पर मुहर लग सकती है। संदीप सहगल अरूण चौहान और मुक्ता सिंह कांग्रेस के लिये संभावनाओं के दरवाजे खोल सकते हैं। इनके अलावा अन्य किसी नेता का नाम अगर आता है तो पार्टी को हार के लिए पहले से तैयार होना होगा।

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