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काशीपुर :तो इसलिए भी पुलिस नहीं लगा पा रही नशाखोरी और अपराधों पर लगाम

काशीपुर । अक्सर अपराधों और नशाखोरी पर लगाम लगा पाने में असफल रहने का दोषारोपण सीधे पुलिस प्रशासन पर किया जाता रहा है। पर इसमें समाज भी बहुत हद तक दोषी है। एक घटना इसका प्रमाण है। हालांकि यह घटना शायद ही पुलिस में दर्ज हो पाये। लेकिन दर्ज न होने का कारण पुलिस नहीं है। शब्द दूत स्वयं इस घटना का प्रत्यक्षदर्शी हुआ। 

घटना कुछ इस तरह है नगर की एक दुकान में कुछ नाबालिग बच्चों ने चोरी की। चोरी का पता चलने पर दुकान मालिक ने अपने स्तर से पता लगाकर चोरी में लिप्त बच्चों को पकड़ भी लिया। दोनों से अपने स्तर पर पूछताछ भी की। पता चला दोनों ही नशे के आदि थे और नशा करने के लिए चोरियां करते हैं। मामले की सूचना पुलिस के एक अधिकारी को दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर दोनों बच्चों को धर लिया। 

जैसे ही पुलिस ने बच्चों को पकड़ा तो मामला उल्टा हो गया। जिस दुकान की चोरी हुई उसके मालिक ने ही बच्चों को छोड़ देने की गुहार लगानी शुरू कर दी। पता चला कि पुलिस के पचड़े में वह नहीं फंसना चाहता था।

घटना साधारण लगती है पर अपराध को बढ़ावा ऐसी ही घटनाओं से मिलता है जिसे हम साधारण समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। पुलिस अपना दायित्व सही से निभाना भी चाहे तो क्या आम नागरिक को भी अपना दायित्व नहीं समझना चाहिए। ऐसी घटनाओं से ही अपराध और नशाखोरी पर लगाम शायद ही लग पाये। वैसे इस घटना में पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है तो समाज का रवैया एक सवाल खड़ा कर रहा है।

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