काशीपुर : गुड़िया जी की गली वाली कांग्रेस का दबदबा क्या फिर देखने को मिलेगा?

काशीपुर । एक दौर था जब डाक्टर लाइन स्थित गुड़िया जी की गली का मतलब कांग्रेस होता था। उत्तराखंड ही उत्तर प्रदेश तक में इस गली का दबदबा था। पर समय ने पलटा खाया और कांग्रेस की स्थानीय राजनीति के कई केन्द्र शहर मे बन गये। पूर्व सांसद के सी सिंह बाबा मुकेश मेहरोत्रा काशीपुर में कांग्रेस के केन्द्र बिन्दु बन कर उभरे। लेकिन जो दबदबा गुड़िया की गली वाली कांग्रेस का था वह फिर कभी देखने को नहीं मिला और उसके बाद कांग्रेस की राजनीति का पतन होता चला गया। यहाँ तक कि एक अदद जीत के लिये कांग्रेस आज तक तरस रही है। लेकिन आश्चर्य की बात यह देखने को मिली कि गुड़िया जी की गली के बाद कांग्रेस में तमाम नेताओं की बाढ़ आ गयी। कार्यकर्त्ताहीन कांग्रेस मैदान में बिना जनाधार के ताल ठोकती नजर आती रही।

स्व नारायण दत्त तिवारी के बाद तो यहाँ कांग्रेस जैसे अनाथ नजर आने लगी। टुकड़ों में बंटी कांग्रेस का हर नेता खुद को प्रदेश स्तर का नेता समझकर स्वयंभू बन गया। ऐसे में स्थानीय कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता खुद को हाशिये पर देखकर खुद ही निष्क्रिय हो गये। बाकी जो कांग्रेस की कमान संभालने का दावा करने लगे वह बिना जनाधार के अपने मुंह मियां मिट्ठू बन गये। उधर प्रदेश स्तर के कांग्रेस नेताओं ने भी अपने अपने समर्थकों का गुट बना लिया। मजे की बात यह है कि सब यहाँ बड़े नेता बन गये। लेकिन बिडम्बना यह रही कि हार का श्रेय लेने को कोई तैयार नहीं था।

अब एक बार फिर कांग्रेस की स्थानीय राजनीति का केन्द्र बदल रहा है। चामुंडा मंदिर स्थित सिंह होटल एंड रेस्टोरेंट कांग्रेस की राजनीति का नया केंद्र बन रहा है। त्रिलोक अधिकारी इस बार केंद्र में हैं। पिछले कुछ समय से कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत यहाँ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। गत दिवस एक कार्यक्रम में पहुंचे हरीश रावत ने यहाँ कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस कार्यक्रम में अधिकांश कांग्रेस जन पहुंचे थे। लंबे समय बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के एक साथ आने से लग रहा है कि कांग्रेस यहाँ एकजुट होने का प्रयास कर रही है।

हालांकि इस कार्यक्रम में भी कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री को कुछ अन्य कांग्रेस नेत्रियों द्वारा जगह न देना चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन का ध्यान रखना होगा वर्ना ऐसी घटनायें पार्टी के लिए नुकसानदायक होगा। 

बहरहाल स्थानीय कांग्रेस का यह पतन का दौर कब तक चलेगा और कब कार्यकर्ता पार्टी के प्रति गंभीर होंगे यह देखना होगा। निजी महत्वाकांक्षी लोग पार्टी के बारे में कब सोचेंगे यह अपने आप में एक चिंतनीय प्रश्न है।

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