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एक्सक्लूसिव काशीपुर : धान खरीद का करनाल कनेक्शन, किसानों के साथ धोखा, सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे की उड़ रही धज्जियां

 विनोद भगत

काशीपुर । उत्तराखंड की कृषि उत्पादन मंडियों से लाखों रुपये का धान हरियाणा भेजा जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाये जाने के सरकार के दावों को पलीता लगा रहे बिचौलिये लाखों के वारे न्यारे कर रहे हैं। दूसरी तरफ आढ़तियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यदि ऐसा नहीं किया जाये तो भूखे मरने की नौबत आ जाये। 

बिडम्बना यह है कि इस कार्य में मंडी अधिकारियों तथा उत्तराखंड से लेकर हरियाणा तक सेटिंग गेटिंग का खेल चल रहा है। काशीपुर मंडी में ट्रक में लादे जा रहे धान की को लेकर जब शब्द दूत ने वहाँ एक व्यक्ति से पूछा तो उसने बिना किसी भय के बताया कि यह धान करनाल के लिए लादा जा रहा है। मतलब साफ है कि कि खुलेआम हरियाणा नंबर के ट्रक पर धान लादते हुये उन्हें अधिकारियों का तनिक मात्र भी भय नहीं है। ठीक मंडी सचिव के आफिस के बगल में खड़े ट्रक में हरियाणा के लिए धान लद रहा था। 

जानकारी करने पर पता चला कि प्रतिदिन शाम को दो दर्जन के लगभग ट्रक मंडी गेट से बेरोकटोक निकल रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावों की  अधिकारी ही सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। 

काशीपुर मंडी से रोजाना 20 से 25 ट्रक तक धान भरकर करनाल भेजे जा रहे है। ताज्जुब की बात ये है जहां ट्रकों को ओवरलोड भरकर 300 से 350 क्विंटल तक भेजा जा रहा है तो वही मंडी के अंदर बिना किसी गेट पास के मंडी शुल्क दिए यह ट्रक निकाले जा रहे है। इन ट्रकों को हरियाणा तक बिना किसी रोक टोक के पहुचाने की जिम्मेदारी जिस ट्रांसपोर्टर की है वह व्यापार कर विभाग के साथ मिलीभगत के जरिये आसानी से इन ट्रकों को पहुँचा देता है । काशीपुर मंडी से निकलने के बाद इन ट्रकों से नजर छिपाने का नजराना सभी को पहुचा दिया जाता है। इस तरह रोजाना लाखों के राजस्व की चोरी की जा रही है।

मंडी में जहाँ एक ओर किसानों की धान की फसल को ज्यादा नमी का बताकर कम दाम में खरीदा जा रहा है तो वही इस धान को दो नम्बर के रास्ते हरियाणा की करनाल मंडी में भेजकर इस खेल में रोजाना लाखों रुपये के राजस्व को चूना  लगाकर अधिकारी व मुनाफाखोर मिलीभगत से अपनी जेबों को भर रहे है। ताज्जुब की बात यह है कि ये खेल काशीपुर की मंडी में ही नही बल्कि प्रदेश की कई और मंडियों में भी धड़ल्ले से चल रहा है।

दरअसल इस समय मंडियों में धान खरीद चल रही है जिसके अंतर्गत सरकारी खरीद मूल्य 1835 प्रति क्विंटल (ग्रेडिंग) व 1815 प्रति क्विंटल ( कॉमन) है । इस सरकारी खरीद में धान की नमी की अधिकतम मात्रा 17 प्रतिशत है, किसानों के धान में 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर उसकी सरकारी खरीद नही हो सकती। वर्तमान में मंडी में आने वाली धान की आवक में पचास प्रतिशत से अधिक धान में 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने से आढ़ती उसे बहुत कम दाम में खरीद रहे है । जानकारी करने पर पता चला  17 प्रतिशत से अधिक नमी के धान को 1300 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है । जबकि हरियाणा के करनाल में इतनी ही नमी वाला धान आसानी से 1650 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक जाता है । दोनों मंडियों के इसी अंतर के कारण रोजाना काशीपुर मंडी में लाखों का खेल खेला जा रहा है । काशीपुर मंडी में सक्रिय मुनाफाखोरों का एक ग्रुप अधिकारियों के साथ सेटिंग गेटिंग का खेल खेलकर इस धान को नम्बर दो के रास्ते से करनाल मंडी तक पहुचाकर रोजाना लाखों के न्यारे व्यारे कर रहे है।

दरअसल ये नमी वाला धान किसानों से पहले कम मूल्य में आढ़ती खरीद लेते है उसके बाद मामूली से कमीशन पर ये धान इस मुनाफाखोर ग्रुप को बेच दिया जाता है, यह मुनाफाखोर इस खरीदे गए माल को ट्रक में ओवरलोड कर बिना किसी मंडी शुल्क दिये बिल्टी के माध्यम से करनाल भेज देते है । जहां ये नकद बिक्री कर दिया जाता है। 

काशीपुर मंडी से माल भरकर जाने वाले वाहन को गेट पास लेना होता है साथ ही मंडी में लगे सी सी टी वी कैमरों से इन वाहनों को पास होना होता है।ऐसे में यदि पिछले एक माह के दौरान के सी सी टी वी फुटेज चेक किये जायें तो ये खेल आसानी से खुल सकता है।

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