उत्तराखंड : 182 रुपये रोज कमाने को विषैले जीवों के बीच काम कर रहीं हैं महिला मजदूर, मनरेगा योजना का खौफनाक सच

 

@विनोद भगत 

काशीपुर ।  मनरेगा मजदूरों ने कम मजदूरी को लेकर शब्द दूत से अपनी पीड़ा बताई। खतरनाक परिस्थितियों में महज 182  रूपये प्रतिदिन कमाने वाले इन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है ये आज इन मजदूरों खासकर महिलाओं ने बताया।

शब्द दूत की टीम आज मनरेगा के तहत काम करने वाले कामगारों के पास पहुंची। ग्राम गढ़ीनेगी की दुर्गापुर राजवाहा की सफाई कर रही महिला मजदूरों ने बताया कि नहर की सफाई के दौरान उनकी जान पर खतरा बना रहता है। जबकि उनकी सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मात्र 182 रुपये प्रतिदिन के लिए उन्हें खतरनाक स्थिति में काम करना पड़ता है। सिंचाई नहर की सफाई के दौरान नहर में सांप और अन्य विषैले जीव निकल आते हैं। एक महिला ने बताया कि नहर की सफाई करते हुए एक महिला मजदूर के हाथ में सांप आ गया। वहीं एक मजदूर के पैर में कांच चुभ गया लेकिन उसकी प्राथमिक चिकित्सा तक नहीं हो पा रही। 

सिंचाई नहर की सफाई कर रही  इंद्रा देवी, पूनम देवी, माया देवी, कृष्णा देवी, नारायणी देवी, सावित्री देवी, शांति देवी, मुन्नी देवी, सरिता देवी राजबाला देवी आदि ने एक स्वर में कहा कि उनकी ईएसआई और बीमा सुनिश्चित की जाए। साथ ही मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ायी जाये। 182 रुपये एक दिन में आठ घंटे के काम के बहुत कम हैं। 

राज्य सरकार क्या कर रही है 

मनरेगा के मामले में अगर सरकार के प्रयासों की बात की जाये तो पिछले दिनों उत्तराखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजे जाने को लेकर मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत राज्य रोजगार गारंटी परिषद की बैठक हुई थी। जिसमें सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मनरेगा में मजदूरी दर प्रचलित मजदूरी दर के सापेक्ष तय करने के मद्देनजर केंद्र को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। 

उस बैठक कहा गया कि वर्तमान में मनरेगा में 182 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी तय है। हालांकि प्रचलित मजदूरी की दर इससे कहीं अधिक है। लेकिन राज्य सरकार इस मामले में सिर्फ प्रस्ताव ही भेज सकती है क्योंकि इस बारे में निर्णय केंद्र को ही लेना है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इसके लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने मनरेगा में वन्यजीवों से सुरक्षा को वन सीमा पर ट्रेंच निर्माण, मत्स्य एवं अन्य विभागों से तालमेल कर मछली व बतख पालन को भी मनरेगा में शामिल कराने को कहा। साथ ही इच्छुक परिवारों को शीघ्र जॉबकार्ड मुहैया कराने, विभिन्न विभागों की योजनाओं को मनरेगा से जोड़ने, योजनाओं की भौतिक प्रगति की निरंतर मॉनीट¨रग करने, आउटकम पर ध्यान देने, ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे हाट बाजार विकसित करने संबंधी निर्देश भी दिए। सीएम ने कहा कि सरकार शीघ्र ही मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू करने जा रही है।

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