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उत्तराखंड :”व्यवस्था तो है पर कार्ययोजना नहीं” पाराशर गौड़ की शब्द दूत से बातचीत

 विनोद भगत /वेद भदोला 

काशीपुर । उत्तराखंड में सब कुछ है व्यवस्था भी है लेकिन व्यवस्थित नहीं है। ये कहना है उत्तराखंड के पहले फिल्म निर्माता निर्देशक पाराशर गौड़ का। 

शब्द दूत संपादक से फोन पर हुई बातचीत में श्री गौड़ ने कहा कि राज्य के प्रवासी लोगों के लिए सिर्फ घोषणा की जाती है धरातल पर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड आना चाहते थे पर अव्यवस्था ने उन्हें आने नहीं दिया। गौड़ कहते हैं कि उन्हें उत्तराखंड से सदा प्यार है उनकी पैतृक भूमि है ये। पिछले दिनों तीन चार महीने तक वह उत्तराखंड में रहे जहाँ उन्होंने अपना मकान भी बनवाया। मकान बनवाने में लाखों खर्च किया। उनका मानना है कि इससे राज्य के कुछ लोगों को रोजगार भी मिला।

पाराशर गौड़ का कहना है कि प्रवासी उत्तराखंड आते हैं तो राज्य की अर्थव्यवस्था में कुछ न कुछ योगदान तो करते ही हैं। लेकिन सरकार उन्हें सुविधा नहीं दे पाती।

“मैं उत्तराखंड अब कभी नहीं आऊंगा” यह बात वह कहना तो नहीं चाहते थे पर राज्य की अव्यवस्था ने उन्हें यह कहने के लिए मजबूर कर दिया।

पाराशर गौड़ का उत्तराखंड के रंगमंच और फिल्म क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। उनकी पहली फिल्म जग्वाल उत्तराखंड सिनेमा की धरोहर है। 

जग्वाल कई मायने में मसलन सांस्कृतिक /सामाजिक व अपनी माँ बोली की पहिचान के लिए जद्हो जहद करते उन तमाम पहाड़ियों  की कहानी है। जग्वाल गढ़वाली संस्कृति, रीति रिवाज, बोली – भाषा की एक नुमाइंदगी व अगुवाई करने की कहानी है। जग्वाल एक पारिवारिक कहानी है जिसमें एक परिवार को रिश्तों और रिश्तों को निभाने के लिए संघर्ष करते दिखाया गया है। यह एक अपरिहार्य कारणों के घटित होने व उसके परिणामों से परिवार को बिखरने व टूटने से बचाने के लिए संघर्ष करती पहाड़ी नारी की कहानी है। 

भारत में फंसे कनाडाई नागरिकों की कनाडा सरकार चार्टर्ड फ्लाइट से 13 मई को घर वापिसी करा रही है। लॉकडाउन के चलते एक लंबे अरसे से भारत में फंसे पराशर गौड़ के लिए ये किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में किसी तरह अपने गांव मिर्चोड़ा (पौड़ी गढ़वाल) से नोएडा तो आ गए। लेकिन आज तक वहीं अपने एक मित्र के यहां ही फंसे हुए हैं।

पाराशर गौड़ की उत्तराखंड को लेकर तल्खी दिखाई दी तो उन्हें फोन किया। फोन पर उनकी बातों में परिवार के पास लौटने की खुशी तो झलक ही रही थी, साथ ही साथ उत्तराखंड को लेकर वे खासे नाराज दिखे। उनका कहना था कि अब कभी उत्तराखंड नहीं जाऊंगा। हालांकि, भारत में कोरोना को लेकर भी वे खासे चिंतित दिखे। ऐसा होना लाजिमी भी है, क्योंकि उनके बहुत से नाते-रिश्तेदार जो यहां रहते हैं।

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