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उत्तराखंड के नवनिर्वाचित सांसदों के सम्मान में जागिजावा कार्यक्रम आयोजित

 

नई दिल्ली। उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन द्वारा सांय ‘जागिजावा’ कार्यक्रम आईटीओ स्थित प्यारेलाल भवन सभागार मे आयोजित कर उत्तराखंड के नव निर्वाचित लोकसभा सांसद अजय भट्ट (नैनीताल-उधमसिंह नगर), तीरथ सिंह रावत (पौड़ी गढ़वाल) व अजय टम्टा (अल्मोड़ा-पिथौरागढ़) का भव्य अभिनन्दन किया गया।

इस अवसर पर फिल्म, लोकगायन, रंगमंच व साहित्यिक विधाओ से जुड़े प्रबुद्ध लोगो को सम्मानित करने के साथ-साथ उत्तराखंड के परिवेश व पृष्ठभूमि मे निर्मित फिल्मों का प्रोमो भी प्रदर्शित किया गया।

मोती शाह व सत्येन्द्र नेगी के संगीत निर्देशन मे लोकगायकों ने कुमाऊँ व गढ़वाल के लोकगीतो का प्रभावशाली लोकगायन किया।

मुख्य अतिथि सुरेश पांडे व उपस्थित गणमान्य अतिथियो के कर कमलों दीप प्रज्वलन की रश्म पूर्ण कर गणेश शिव वंदना-
शिव जी की जटा छोड़ी…हिमवंती गुणवंती मेरी गंगा माई…. शिव जी की गंगा छोड़ी….
गायन पर कथक बाल नृत्यांगना श्रीवर्णा रावत ने अपने नृत्य की प्रभावशाली झलक पेश कर कार्यक्रम की शोभा बधाई।

रविंद्र गुड़ियाल लिखित व रमेश डंगरियाल निर्देशन हास्य से भरपूर लघु नाटक ‘तितरी फंसे-चखुलि फंसे’ का सफल मंचन किया गया।

राजेश मालगुडी की लघु फिल्म ‘हमरि विरासत’ निर्देशक ब्रज रावत। अरुषि निशंक की ‘मेजर निराला’। लेखक, निर्देशक व निर्मात्री सुशीला रावत की ‘द्द्दी की आस’। सुरेश पांडे की एसकेपी प्रोजेक्ट आधारित फिल्म तथा डीभा धामी की ‘मंगल द हिल मैंन’ फिल्म का प्रोमो प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शित सभी फिल्म उत्तराखंड की बोली-भाषा व पृष्टभूमि पर पहाड़ के पलायन, जटिल जीवन व वहा के जनजीवन की समस्याओ पर निर्मित थी।

कार्यक्रम आयोजक अध्यक्षा सुशीला रावत, महासचिव नरेंद्र रौथाण, कोषाध्यक्ष खुशाल सिंह बिष्ट व सर्ववेश्वर बिष्ट, कुसुम चौहान ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश पांडे, तीनों सांसदों, रतन सिंह रावत (आईआरएस), एम एस रावत, संजय जोशी, नरेंद्र लड़वाल का भव्य स्वागत पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह, अभिनन्दन पत्र व शाल ओढा कर किया व सम्मानित अतिथियो को मंचासीन किया।

संगठन महासचिव नरेंद्र रौथाण ने अतिथियो व सभागार मे उपस्थित सभी श्रोताओं का हार्दिक अभिनंदन व स्वागत किया। संगठन के उद्देश्यों व भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला।

श्रोताओं व मंचासीन सांसदों के समक्ष संगठन का प्रस्ताव रख उन्हे पूर्ण करने हेतु सविनय निवेदन किया।

संगठन के प्रस्तावो मे गढ़वाली, कुंमाउनी व जौनसारी बोली-भाषा को संविधान की आंठवी अनुसूचि मे डालने।

उत्तराखंड की बोली-भाषा के साथ अन्य बोलियों व वालीवुड की फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहन देने से मध्य हिमालय उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य व वहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय युवाओ को रोजगार व व्यवसाय को बल मिलने व बढ़ते पलायन पर अंकुश लगाने व राज्य के राजस्व बढोत्तरी के साथ-साथ, प्रदेश स्तर पर उत्तराखंड फिल्म परिषद को पुनर्गठित कर उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन से जुड़े अनुभवी प्रबुद्ध फिल्म निर्माताओं व कलाकारों की भागीदारी, प्रवास मे जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे कलाकारों की समस्याओ के निदान हेतु नीति निर्माण मे संगठन की भूमिका की सुनिश्चता तथा राज्य व केन्द्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड के विलुप्ती की कगार पर खड़े वाद्ययंत्रों, पारंपरिक लोकगीत संगीत नृत्य, लोकगाथाओं व अन्य स्मृद्ध हस्तकलाओं के संरक्षण व संवर्धन कर संग्रहालय व वाचनालय निर्मित कर उन्हे संरक्षित व संवर्धित करने।

प्रदेश के बुजुर्ग कलाकारों, लोकगायकों की लोककला को तत्काल संरक्षित करने की मांग सांसदों के समक्ष रखी। संगठन के मसौदा पत्र की प्रति प्रत्येक सांसद को सौपी।

इस अवसर पर आयोजकों द्वारा संगठन का दूसरा सम्मान समारोह आयोजित कर उत्तराखंड जौनसार जनजाति समुदाय (चकराता) के लोक कलाकार नंदलाल भारती को उत्तराखंड जागिजावा सम्मान। अनिल घिंडियाल को थिएटर, फिल्म व रंगमंच पर लोक कला सम्मान। ललित केशवान को लोककला साहित्य सम्मान।हरि सुमन बिष्ट को साहित्य सम्मान। हीरा सिंह राणा को लोककला शिरोमणी सम्मान व 11हजार रुपयो का चैक। गायिका आशा नेगी व पदम गुसाई को कला सम्मान से नवाजा गया।

गायक अमित सागर व नृत्यांगना सुवर्णा रावत को पुष्प गुच्छ, शाल ओढा कर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्ति के बाद गायिका आशा नेगी ने न्योली गीत-
1-उत्तराखंड की देव भूमि… देश रौल, परदेश रौल… ओ मेरी देवभूमि…ऊंचा-ऊंचा डान पहाड़ा…. डाउ बोटियों के तुमेरी यादा…
2- रंगीली कुमाऊँ म्यरी, छबीली गढ़वाला.. बागेश्वरा बजारा…
गीत गाकर श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध किया।

अमित सागर ने जागर गायन की धुन मे-
चैता की चैतवाला…रेशमी रुमाला….आहा .. भुर-भूरा उडोलो…तिसरी फूल माला हरिद्वारा चढैली…आहा…
गाकर अपनी प्रभावशाली आवाज का जादू बिखेर सभागार मे बैठै अतिथियो व श्रोताओं को देर तक तालियां बजाने को मजबूर किया।

नवनिर्वाचित सांसद अजय टम्टा, तीरथ सिंह रावत व अजय भट्ट ने कुंमाउनी व गढ़वाली बोली में लोगो को संबोधित कर बोली-भाषा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर अवगत कराया कि सभी उत्तराखंडी संवेदन शील हैं देश व प्रदेश के प्रति। उन्होंने पूर्णविश्वास के साथ कहा कि अब वक्त आ गया है कि उत्तराखंड की बोली-भाषा को 8वी अनुसूची मे डलवाना ही होगा। बोली ही हमारी मुख्य पहचान है, जो हमे जोड़े रखती है। उत्तराखंड के लोग परिश्रमी हैं, निष्ठावादी हैं जिस बल वे देश मे अग्रणी श्रेणी के लोगों मे गिने जाते हैं।

सांसदों ने पलायन को उत्तराखंड की प्रमुख समस्या माना। पलायन के कारको मे उक्ता कर किया गया पलायन, शौकिया तौर पर किया गया व रोजगार के लिए किया गया पलायन मुख्य माना। पलायन को पहाड़ी इलाको के गिरते मतदान प्रतिशत से भी जोड़ा। सांसदों ने विश्वास दिलाया कि सरकार की भावी विकास योजनाओं के बल उत्तराखंड से हो रहे पलायन पर अंकुश लगेगा।

सांसदों ने व्यक्त किया उत्तराखंड की फिल्म देख आनन्दित नही होना चाहिए। उसके पीछे की पृष्ठ भूमि का अध्ययन मनन करना होगा व उसके मौलिक रहस्य के तह मे जाना होगा, तभी हम फिल्म निर्माण के महत्व को समझ पायेंगे।

सांसदों ने कहा पहले बाहरी लोग उत्तराखंड के जटिल जीवन को देख पहाड़ी इलाको मे न ही जाना चाहते थे न ही बसना। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद स्थिति बदली है। अब सब वहा जाना चाहते हैं। हमारे प्रवास मे निवासरत प्रवासियों को उत्तराखंड वापस लौटना चाहिए, वहा की लोक संस्कृति, बोली-भाषा व परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन तथा स्वस्थ जीवन व लंबी आयु की प्राप्ति के लिए।

नैनीताल सांसद व उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट ने अपने संबोधन के बीच बचपन के दो गीत सुना श्रोताओं को गदगद किया। गीत थे-
1-चैतो मैहणं ऐगो….सुणो मेरी सासु…इज़्यू कोणी होई मेरी कब आली…चैता मैहणं ऐगो अब मैता जोलों…
2- क्वैलो क्वैलो…दांत मे बीड़ी…।

उत्तराखंड की जय।भारत माता की जय।के उदघोष के साथ सांसद अजय भट्ट ने अपना गूढ़, विद्वत व ज्ञानवर्धक संबोधन समाप्त किया।

सभी सांसदों ने उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन द्वारा उनके सम्मान मे आयोजित भव्य अभिनन्दन समारोह हेतु संगठन का आभार व्यक्त किया व प्रेषित मांगों को पूर्ण करने हेतु पूर्णविश्वास के साथ आश्वस्त किया।

कार्यक्रम समापन से पूर्व आयोजन की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख उद्योगपति सुरेश पांडे ने अपने संबोधन मे उत्तराखंड के सभी नवनिर्वाचित सांसदों का दिल से स्वागत व अभिनन्दन किया। उनके द्वारा लोगो को संबोधित करने हेतु आभार व्यक्त किया। दर्शको का धन्यवाद कर कहा, हम देवभूमि के लोग हैं, हमारी पहचान मेहनत व ईमानदारी है। उन्होंने कहा, उत्तराखंड के लोगो की भावनाओं मे देवत्व है। देश के नवनिर्माण मे हम अच्छी भूमिका मे हैं। हमारे पांचों सांसद उत्तराखंड के पांच रत्न हैं, आप उत्तराखंड के जनमानस को प्रगति के पथ पर अग्रसर करे, कामना है।

आयोजित भव्य कार्यक्रम का संचालन हेम पंत व अजय बिष्ट ने बड़ी सूझबूझ व ओजस्वपूर्ण तरीके से किया।

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