आर्थिक मोर्चे पर केन्द्र सरकार की मुश्किलें बढ़ी, जालान कमेटी की रिपोर्ट पर एक सदस्य ने नहीं किये हस्ताक्षर, आरबीआई सरप्लस मिलने में और देरी

सुभाष चंद्र गर्ग ने तीसरी बार मोदी सरकार की मुश्किल बढ़ाई

 वेद भदोला  

नई दिल्ली।   वित्त सचिव पद से हटाए गए सुभाष चंद्र गर्ग ने आरबीआई के सरप्लस को लेकर गठित जालान कमेटी की रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं किए हैं जिससे एक अलग असमंजस पैदा हो गया है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव का एक बयान इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। उनका कहना था कि भारतीय रिजर्व बैंक के सरप्लस को हड़पने की कोशिशों से मोदी सरकार की हताशा का पता चलता है। सुब्बाराव ने आगाह किया कि रिज़र्व बैंक के सरप्लस के मूल्यांकन के समय सजग रहने की जरूरत है।

इससे कुछ दिन पहले खबर आई थी कि आरबीआई के सरप्लस को लेकर गठित की गई बिमल जालान कमेटी ने अपना काम पूरा कर लिया है और जल्द ही वह अपनी सिफारिशें रिजर्व बैंक को सौंप देगी। इसके बाद माना जा रहा था कि आर्थिक मोर्चे पर जूझ रही सरकार को आरबीआई सरप्लस से जल्द ही कुछ मदद मिलेगी। लेकिन, अब बिमल जालान कमेटी ने फैसला किया है कि समिति के सदस्य एक बार और बैठक करेंगे।

जानकारों की माने तो हो सकता है कि इस वजह से जालान कमेटी की रिपोर्ट रिजर्व बैंक को सौंपे जाने में और देरी हो। कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपने में जितनी देरी करेगी, आरबीआई से सरकार को सरप्लस मिलने में भी उतना अधिक वक्त लगेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस देरी और असमंजस की वजह वही सुभाष चंद्र गर्ग बन रहे हैं जो आरबीआई सरप्लस के जल्द से जल्द स्थानांतरण के सबसे बड़े पैरोकारों में एक रहे हैं।

इस असमंजस की एक वजह तो यह है कि बतौर आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग खुद बिमल जालान कमेटी के सदस्य थे और कमेटी अपनी सिफारशें रिजर्व बैंक को सौंपती उससे पहले ही उनका तबादला कर उन्हें बिजली सचिव बना दिया गया। सुभाष चंद्र गर्ग के स्थानांतरण के बाद बिमल जालान कमेटी के लिए अनिश्चितता की स्थिति इसलिये भी है क्योंकि गर्ग ने फिलहाल तैयार रिपोर्ट पर अपनी असहमति जताते हुए हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं।

ऐसे में सुभाष गर्ग का रिपोर्ट फाइनल न होने का बयान समिति के लिए असहज करने वाला था। हालांकि, ऐसी खबरें पहले से आ रहीं थीं कि तत्कालीन वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग जालान कमेटी के सदस्यों के रवैये से नाखुश हैं और वे एकमुश्त ट्रांसफर की वकालत कर रहे है।

सुभाष चंद्र गर्ग के तबादले और रिपोर्ट पर उनके दस्तखत करने से इंकार ने जालान कमेटी को विचित्र स्थिति में डाल दिया है। जानकार कहते हैं कि किसी कमेटी में किसी सदस्य का असहमत होना एक अलग बात है, लेकिन वह अपनी असमति दर्ज करने के साथ रिपोर्ट पूरी होने पर भी मुहर लगा देता है। लेकिन, इस मामले में सुभाष चंद्र गर्ग सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि अभी समिति ने अपना काम ही पूरा नहीं किया है।

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